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राज्य में सर्वोत्तम स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित बनाएगी सरकार - मुख्यमंत्री

May 07, 2018 11:06 AM

शिमला - इन्दिरा गांधी आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान शिमला के ऑर्थोपेडिक शल्य चिकित्सा विभाग द्वारा आयोजित उत्तरी क्षेत्र ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के 37वें वार्षिक सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने कहा कि यद्यपि हिमाचल प्रदेश एक छोटा राज्य है, फिर भी चिकित्सा क्षेत्र में इसका बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि राज्य के चिकित्सक देश के बहुत से प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थानों में लोगों को गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं, जो राज्य के लोगों के लिए गौरव की बात है।

जय राम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि ऑर्थोपेडिक विभाग को मजबूत किया जाए ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने कहा कि निरन्तर बढ़ रही सड़क दुर्घटनाएं चिन्ता का कारण हैं, जिसके चलते ऑर्थोपेडिक विभाग को लोगों को आपातकालीन सेवाएं प्रदान करने के लिए अतिरिक्त समय तक काम करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह भी सुनिश्चित बनाया जाएगा कि आईजीएमसी में लोगों को सर्वोत्तम विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हों ताकि उन्हें उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े।

मुख्यमंत्री ने आशा व्यक्त की कि सम्मेलन राज्य के लोगों को उच्च स्वास्थ्य सुविधा प्रदान करने के लिए कारगर साबित होगा। उन्होंने कहा कि सम्मेलन के दौरान आए मुख्य सुझावों को सरकार को भेजा जाना चाहिए ताकि ऑर्थोपेडिक क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश का एक अग्रणी राज्य बनाने का है। उन्होंने कहा कि इसके लिए चिकित्सा पेशेवरों का सक्रिय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार देश तथा विदेशों के विभिन्न भागों में सराहनीय सेवाओं के लिए राज्य के चिकित्सकों को सम्मानित करने की सम्भावनाओं का पता लगाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार विभाग को नवीनतम उपकरणों के साथ सुसज्जित करने के लिए हर सम्भव सहायता प्रदान करेगी। उन्होंने चिकित्सकों से स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक विज़न दस्तावेज तैयार करने का आग्रह किया, जो राज्य की भौगोलिक स्थितियों के अनुरूप हो।

शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि पहाड़ी राज्य होने के कारण यहां दुर्घटनाओं के अधिक मामले हैं और इसके चलते ऑर्थोपेडिक विभाग को और मजबूत बनाने पर बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आईजीएमसी ऑर्थोपेडिक विभाग को उचित स्थान प्रदान किया जाना चाहिए ताकि मरीजों को उपचार के लिए किसी प्रकार की असुविधा न हो।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि राज्य सरकार ने केवल चार महीने पहले ही प्रदेश की बागडोर सम्भाली है और तब से राज्य सरकार उन्नति और समृद्धि के मार्ग पर तेजी के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि हालांकि प्रदेश के स्वास्थ्य मानक देश के अधिकांश राज्यों की तुलना में श्रेष्ठ हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकि है। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों को 330 जेनेरिक दवाईयां निःशुल्क उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एक आदर्श व्यवसाय है और चिकित्सकों को लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए मिशन की भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि चम्बा, नेरचौक तथा नाहन तीनों मैडिकल कॉलेजों को एमसीआई द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है और हाल ही में भारतीय चिकित्सा परिषद ने हमीरपुर में भी मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए मंजूरी प्रदान कर दी है।

आईजीएमसी ऑर्थोपेडिक विभाग के प्रमुख एवं सम्मेलन के आयोजक डा. मुकुन्द लाल ने इस अवसर पर मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। उन्होंने सम्मेलन के दौरान आयोजित की गई विभिन्न गतिविधियों का ब्यौरा दिया। उन्होंने मुख्यमंत्री से विभाग को सुदृढ़ बनाने का आग्रह किया ताकि राज्य के प्रतिष्ठित स्वास्थ्य संस्थान में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सके।

आईजीएमसी के प्राचार्य डॉ. रवि शर्मा, ब्रिटिश ऑर्थोपेडिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. आनन्द मोहन, बाबा फरीद मैडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. राज बहादुर, उत्तर क्षेत्र ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रमेश सेन, एसोसिएशन के सचिव डॉ. हरपाल सेनी तथा क्षेत्र के प्रतिष्ठित ऑर्थोपेडिक शल्य चिकित्सकों सहित अन्य लोग भी उपस्थित थे।

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