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10वीं के बाद विषय चयन कैसे करें

January 01, 2013 03:22 PM

10वीं के बाद विषय चयन कैसे करें

दसवीं के बाद 11वीं में विषय चयन किसी भी विद्यार्थी के करियर निर्माण की बुनियाद माना जाता है। लेकिन सीबीएसई 10वीं में पहली बार शुरू हुई ग्रेडिंग पद्धति ने स्टूडेंट्स और पेरेन्ट्स को पेसोपेस में डाल दिया है। ए-1,ए-2, बी-1, बी-2 जैसे ग्रेडिंग से एकदम विद्यार्थी की विषय में तुलनात्मक योग्यता और दक्षता मूल्यांकित नहीं हो पाने से 11वीं विषय चयन संबंधी कठिनाई बढ़ गई है। ऐसे में विषय चयन संबंधी मनोवैज्ञानिक टेस्ट का महत्व बढ़ गया है। यह टेस्ट करियर दिशा 111, गुमास्ता नगर पर उपलब्ध है।  वैश्वीकरण, उदारीकरण और भूमंडलीकरण के वर्तमान दौर में अच्छे करियर के लिए प्रतियोगिता दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। ऐसी प्रतियोगिता के बीच सफलता इस बात पर आधारित होती है कि करियर अवसरों की डगर पर किस तरह आगे बढ़ा जा रहा है। नए दौर में युवाओं को यह बात अच्छी तरह समझनी होगी कि आज औद्योगिक व सूचना क्रांति के युग में करियर संबंधी कई विकल्प उनके सामने खुल गए हैं, जिनमें से वे अपनी पसंद का कोई क्षेत्र चुनकर काम शुरू करें तो आसानी से सफलता प्राप्त की जा सकती है। सर्वप्रथम करियर का सही चुनाव बुनियादी जरूरत के रूप में दिखाई देता है। यदि युवा अपने जीवन में करियर का सही चुनाव कर लेता है तो समझो उसने अपनी सफलता का आधा रास्ता पार कर लिया है। विडंबना है कि देश में शिक्षा के नए परिदृश्य और करियर की दिशाओं की अनभिज्ञता के कारण अनेक छात्र-छात्राएँ योग्यता और प्रतिभा के बावजूद सर्वोत्तम करियर विकल्प से वंचित रह जाते हैं। वर्तमान में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री सीधे रोजगार की दृष्टि से बहुत कम उपयोगिता रखती हैं। अब प्रोफेशनल कोर्स और मार्केट में सेलेबल कोर्स ही करियर की ऊँचाई दे पाते हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि करियर से संबंधित तीनों पक्ष-विद्यार्थी, शिक्षक और अभिभावक करियर संबंधी सूचनाओं और भविष्य निर्धारण संबंधी रास्ते से अनभिज्ञ हैं। जरूरत इस बात की है कि करियर की विभिन्न दिशाओं संबंधी जानकारियाँ और मार्गदर्शन अभिभावकों एवं विद्यार्थियों को होना चाहिए।    वास्तव में दसवीं कक्षा के दौरान ही बच्चों की सोच व रुचियों के बारे में जानकारी लेकर उन्हें सही सलाह दी जानी चाहिए। ऐसा होने पर वे अपनी पूरी शक्ति और परिश्रम से निर्धारित करियर की डगर पर आगे बढ़ पाते हैं। यदि विद्यार्थियों को यह ज्ञात है कि कौनसे कोर्स करियर की ऊँचाई देने वाले हैं? कौनसी शिक्षण संस्थाएँ वास्तव में श्रेष्ठ हैं? प्रगति के लिए कौनसी योग्यता और विशेषज्ञता जरूरी है ? तो निश्चित रूप से उनका परिश्रम और समय का व्यय सार्थक हो सकता है। एक वक्त था जब करियर प्लानिंग स्नातक के बाद की जाती थी फिर करियर प्लानिंग बारहवीं के बाद की जाने लगी परंतु वर्तमान में करियर प्लानिंग का सबसे उचित समय दसवीं कक्षा में प्रवेश करने के साथ ही उपयुक्त माना जाता है। ऐसा इसलिए कि दसवीं की पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों में यह विचार विकसित हो सके कि उनकी पसंद के जो विषय उन्हें अगले वर्ष चुनने हैं, उन विषयों की कुछ परिपक्वता वे मन में बना सकें ।  विद्यार्थियों को यह बताया जाना चाहिए कि ग्यारहवीं में कौनसे विषय लेने से बारहवीं के बाद कौनसे करियर प्राप्त किए जा सकते हैं। करियर तय करते समय अभिभावकों की इच्छा का ही नहीं बच्चों की रुचि, योग्यता व क्षमता का मूल्यांकन भी किया जाना चाहिए । इस आधार पर बारहवीं के बाद जो-जो करियर निर्धारित हो सकते हैं उन पर विचार किया जाना चाहिए। कौन-सा करियर चुना जाए और उसके लिए प्रारंभिक रूप से तैयारी कैसे शुरू की जाए, इस हेतु अनुभवी करियर काउंसलर से सलाह करके करियर प्लानिंग की जानी चाहिए। रुचियों और क्षमताओं को लेकर यदि कोई संशय हो तो उसके लिए साइकोलॉजिकल एवं एप्टिट्यूट टेस्ट का सहारा लिया जाना चाहिए। करियर प्लानिंग हेतु देश के विभिन्न संस्थानों द्वारा करियर काउंसलिंग की जाती है। करियर प्लानिंग के बाद अभिभावकों को चाहिए कि वे अपने बच्चों को निर्धारित लक्ष्य की तरफ आगे बढ़ाते रहें। छात्रों को चाहिए कि वे अपने करियर प्लान पर उसी तरह ध्यान दें जिस तरह अर्जुन को उनके लक्ष्य के अनुरूप केवल चिड़िया की आँख ही दिखाई दी थी। परिणामस्वरूप अर्जुन लक्ष्य भेदने में सफल हुए थे।  करियर प्लानिंग के बाद छात्रों और अभिभावकों के द्वारा यह निर्धारित किया जाना चाहिए कि छात्र बारहवीं के बाद कौनसा पाठ्यक्रम लें, जो उपयोगी रहे और कौनसी शिक्षण संस्था में प्रवेश लें, जहाँ प्रवेश के बाद ठगे जाने की आशंका न हो। वास्तव में नए पाठ्यक्रमों के ढ़ेर और नए शैक्षणिक संस्थानों की बाहुल्यता के बीच उनमें श्रेष्ठ चयन की दृष्टि से पालक और बालक असमंजस की स्थिति में होते हैं। कई शिक्षण संस्थानों ने नए-नए पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं लेकिन अध्यापन के लिए फैकल्टी की कमी है। किसी भी शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेने के पहले आप उस संस्थान की पूरी जाँच पड़ताल कर लें। हो सके तो उस संस्थान में पढ़ रहे छात्रों से मिलकर उस संस्थान की शिक्षण सुविधाओं एवं प्लेसमेंट की जानकारी प्राप्त कर लें।   विभिन्न योग्यताओं के विद्यार्थियों के लिए उनकी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुरूप करियर की कई दिशाएँ मौजूद हैं। कला के छात्रों के लिए भाषा विज्ञान, विधि, समाजविज्ञान, मनोविज्ञान, साहित्य आदि में करियर होते हैं। कॉमर्स के छात्रों के लिए बैंकिंग, सी.ए., सी.एस., कास्ट अकाउंटेंसी, बीमा, विपणन, विदेश व्यापार आदि में करियर होते हैं। विज्ञान के छात्रों के लिए इंजीनियरिंग, मेडिकल, बायोटेक्नोलॉजी, मर्चेंट नेवी, अंतरिक्ष विज्ञान, कम्प्यूटर तथा सूचना प्रौद्योगिकी आदि में करियर होते हैं। कई ग्लैमरस और प्रतिष्ठापूर्ण करियर लगभग सभी छात्रों के लिए खुले हैं, जैसे- एयरलाइंस, ट्रेवल एंड टूरिज्म, मॉडलिंग, जनसंचार, फैशन डिजाइनिंग, पत्रकारिता आदि। देश रक्षा की जिम्मेदारी से भरे हुए करियर भी सभी के लिए खुले हुए हैं। वर्तमान में कम्प्यूटर की ढे़र सारी उपयोगिता को देखते हुए इसके प्रशिक्षण पर भी व्यापक जोर दिया जा रहा है। किसी भी नौकरी के लिए कम्प्यूटर ज्ञान की अनिवार्यता को देखते हुए कम्प्यूटर प्रशिक्षण संस्थानों की बा़ढ सी आ गई है। यह सही है कि सूचना प्रौद्योगिकी के बढ़ते दायरे ने प्रशिक्षित कम्प्यूटर विशेषज्ञों को रोजगार के अवसर मुहैया कराए हैं परंतु केवल कम्प्यूटर संस्थान से डिग्री, डिप्लोमा कोर्स अथवा अल्पावधि प्रशिक्षण रोजगार या नौकरी दिलाने में नाकाफी है विद्यार्थियों द्वारा मान्यता प्राप्त् विश्वविद्यालय द्वारा उपलब्ध कम्प्यूटर कोर्स ही किए जाना चाहिए या फिर ऑल इंडिया कौंसिल ऑफ टेक्निकल एजुकेशन (ए.आई.सी.टी.ई.) द्वारा मान्यता प्राप्त कम्प्यूटर संस्थान से डिग्री या डिप्लोमा के लिए आगे बढ़ना चाहिए। यह बहुत जरूरी है कि आकर्षक विज्ञापनबाजी पर आधारित संस्थानों में दाखिला लेने से पूर्व उनके पाठ्यक्रमों एवं अन्य बातों की जानकारी भली-भाँति प्राप्त कर लें। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग एवं अन्य शैक्षणिक परिषद से मान्यता संबंधी जाँच-पड़ताल कर लें। संबंधित विभिन्न शिक्षण संस्थाओं का तुलनात्मक मूल्यांकन करके ही प्रवेश सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में पछताना न पड़े। जब आप अपने करियर का चुनाव कर लें, तो जो भी करियर आपने चुना है उस करियर हेतु स्वयं को सौ प्रतिशत समर्पित कर दें। अपने कार्यक्षेत्र के प्रति समर्पण ही आपको सफलता के द्वार तक ले जाता है।

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