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बीपीओ और केपीओ में रोजगार के चमकीले अवसर

January 01, 2013 03:15 PM

बीपीओ और केपीओ में रोजगार के चमकीले अवसर
    इस समय जब दुनिया में वित्तीय संकट से हड़कम्प मचा हुआ है, तब भी भारतीय युवाओं के
    लिए बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) और नॉलेज प्रोसेस आउटसोर्सिंग (केपीओ) क्षेत्र
    में कॅरियर के सबसे अधिक अवसर मौजूद हैं। 12वीं के बाद उपयुक्त तैयारी करके विद्यार्थी
    इस क्षेत्र में आ सकते हैं। भारत बीपीओ और केपीओ के लिए दुनिया का सबसे प्रमुख केंद्र
    बन गया है। सस्ते श्रम एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य के कारण भारत में बीपीओ उद्योग का सालाना
    कारोबार 2.34 अरब डॉलर का है। अगले पाँच वर्षों में तकनीकी क्षेत्र, शिक्षा, चिकित्सा,
    बीमा, बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्र आदि में आउटसोर्सिंग के पाँच लाख से अधिक अवसर भारतीय
    युवाओं के लिए उपलब्ध होंगे। अच्छी अंग्रेजी, बेहतर उच्चारण, संवाद दक्षता, व्यापक
    कम्प्यूटर साक्षरता और उच्च गुणवत्ता जैसी प्रमुख विशेषताओं से सुसज्जित होकर इस क्षेत्र
    में भारतीय युवा कॅरियर की ऊंचाइयाँ प्राप्त कर सकते हैं।  

    वास्तव में बीपीओ और केपीओ सूचना प्रौद्योगिकी देन एक नई व्यापार व्यवस्था है, जिसके
    तहत किसी संगठन के व्यापारिक उत्पादक कार्यों को किसी बाहरी विक्रेता को हस्तांतरित
    कर उससे पूरा कराया जाता है। इसमें वितरण चूँकि आई.टी. आधारित होता है, इसलिए बीपीओ
    को सूचना प्रौद्योगिकी आधारित सेवाएँ भी कहा जाता है। सरल भाषा में हम यह भी कह कहते
    हैं कि बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग का मतलब है कोई कार्य व्यापारिक संस्थान के परिसर
    के बाहर देश या विदेश में कहीं भी उपयोगी रूप से सम्पन्न कराना। ऐसा आईटी के बढ़ते
    प्रभाव के चलते संभव हो सका है।   

    दरअसल, पश्चिमी और योरपीय देशों में श्रम काफी महँगा है, जिससे किसी भी सेवा की लागत
    बढ़ जाती है, जबकि वही कार्य भारत जैसे देश में कराने पर यह बेहद सस्ता पड़ता है। इसे
    हम एक उदाहरण से अच्छी तरह समझ सकते हैं। मान लीजिए कि अमेरिका में 100 पेजों की एक
    किताब की सामग्री टाइप कराने में प्रति पेज दस डॉलर का खर्च आता है, जबकि वही कार्य
    भारत जैसे देश में कराने पर एक डॉलर प्रति पेज से भी कम खर्च आता है। इस तरह की सेवाओं
    के लिए विकसित देशों में मासिक वेतन के रूप में एक लाख रुपए से अधिक की डिमांड होती
    है, जबकि भारत में यह औसतन आठ-दस हजार रुपए मासिक वेतन देकर कराया जा सकता है। इस प्रकार
    कार्य की लागत में दस गुना का अंतर आ जाता है। अनुसंधान से पता चला है कि अमेरिका-
    ब्रिटेन में कॉल सेंटरों के संचालन में आने वाली करीब 70 प्रतिशत लागत का सीधा संबंध
    प्रशिक्षण, लाभ और अन्य श्रम प्रोत्साहनों सहित कर्मिकों पर आने वाली लागत के साथ है
    जबकि भारत में कार्मिकों से संबंधित लागत मात्र 35 प्रतिशत के आसपास बैठती है। 
 

    सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सेवाओं को बाहरी एजेंसियों से कराने की प्रक्रिया
    कई वर्षों से अपनाई जा रही है, परंतु इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकी के उदय के साथ
    पिछले 10 से 15 वर्षों में इनके प्रचलन में बहुत तेजी आई है। बड़ी संख्या में विभिन्न
    उद्योगों से संबद्ध बड़ी कंपनियों ने बीपीओ के लाभों पर विचार किया और अपने अनुषंगी
    व्यापारिक उत्पादक कार्यों का कुछ भाग बाहरी एजेंसियों को सौंपना शुरू कर दिया। इससे
    बड़ी कंपनियों की कार्यक्षमता में सुधार आया और लागत में भारी कमी आई। इस नई व्यापारिक
    संकल्पना के प्रचलन ने दुनियाभर में अनेक विशेषज्ञतापूर्ण बीपीओ सेवा प्रदान करने वालों
    को जन्म दिया।
      

    वर्तमान में भारत आईटी आउटसोर्सिंग का वैश्विक केंद्र बन गया है। इसका कारण यह है कि
    भारत में अत्यंत कुशल एवं प्रशिक्षित कर्मियों का समूह उपलब्ध है और यहाँ भली-भाँति
    परिभाषित व्यापार प्रक्रियाओं को बहुत तेजी से अपनाया जा रहा है। अनुकूल माहौल बनाने
    में सरकार के सक्रिय सहयोग और ढाँचागत सुधारों की बीपीओ उद्योग के विकास में उत्प्रेरक
    भूमिका रही है। बीपीओ के क्षेत्र में भारत की प्रगति के पीछे एक कारण यह भी है कि हमारे
    यहाँ संचार का मजबूत ढाँचा कायम हो चुका है। हाल ही में समुद्र में बिछाई गई भारत की
    पहली प्रायवेट केबल के चालू हो जाने से अंतरराष्ट्रीय बैंडविड्थ स्थिति में जबरदस्त
    सुधार आया है। दूरसंचार उद्योग के निजीकरण से नई कंपनियाँ अस्तित्व में आई हैं और दूरसंचार
    की दरों में महत्वपूर्ण गिरावट आई है। उच्च कोटि की त्वरित सेवा, वर्ल्ड क्लास टेक्नोलॉजी,
    बड़ी संख्या में आईटी एक्सपर्ट और अंग्रेजी में पारंगत युवाओं के अलावा सस्ता श्रम
    ये ऐसे कारण हैं, जिनकी बदोलत भारत विगत डेढ़ दशक से पूरे विश्व में बिजनेस प्रोसेस
    आउटसोर्सिंग यानी बीपीओ के क्षेत्र में अव्वल बना हुआ है। इस क्षेत्र में बीमा, बैंकिंग,
    फार्मास्युटिकल्स, दूरसंचार, ऑटोमोटिव और एयरलाइंस का वर्चस्व है। बीमा एवं बैंकिंग
    ऐसे क्षेत्र हैं जो भारी मात्रा में बचत राशि हासिल करने में सिर्फ इसलिए कामयाब रहे
    हैं कि वे अपनी प्रक्रियाओं का बड़ा हिस्सा बाहरी एजेंसियों को सौंप सकते हैं। वे कॉल
    सेंटरों के जरिए दावे और ऋण प्रोसेस करने तथा ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करने जैसे
    कार्य संचालित कर रहे हैं।
       

    बीपीओ और केपीओ के अंतर्गत प्रमुख रूप से ये सेवाएँ सम्मिलित की जाती हैं-

    1. कॉल सेंटर- इन सेवाओं के अंतर्गत तकनीकी सहायता और हेल्प डेस्क विशेषताएँ शामिल
    हैं।
    2. विपणन सेवाएँ- इसके अंतर्गत टेली मार्केटिंग की गतिविधियाँ आती हैं। इसके अंतर्गत
    उन ग्राहकों को सेवाएँ प्रदान करना है, जो फोन पर ऑर्डर देते हैं।
    3. मानव संसाधन सेवाएँ- इसमें शिक्षा, प्रशिक्षण, भर्ती, कार्मिक प्रशासन, आकस्मिक
    श्रमिक प्रबंधन सम्मिलित है।
    4. इंजीनियरी सेवाएँ- इनके अंतर्गत किसी उत्पाद या सेवा के निर्माण के लिए तकनीकी परामर्श
    प्रदान किया जाता है। इन कार्यों में अनुसंधान एवं विकास, उत्पाद डिजाइन, परीक्षण परियोजना
    प्रबंधन, प्रलेखन और इंजीनियरी विश्लेषण शामिल हैं।
    5. लॉजिस्टिक्स या संभार तंत्र- इन सेवाओं में भुगतान प्रक्रिया, इन्वोइस एकत्रित करना,
    ढुलाई, मार्ग अनुकूलन, वेयर हाउसिंग और स्टॉक नियंत्रण सेवाएँ शामिल हैं।
    ६. स्वास्थ्य देखभाल- इस उद्योग की शुरुआत मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन सेवाओं से हुई है
    और इसकी परिणति रोग प्रबंधन एवं मेडिकल इमेजिंग जैसी सेवाओं में हो रही है।
    बीपीओ और सेवा क्षेत्र में शीघ्र और अच्छी नौकरी पाने के लिए प्रशिक्षण की जरूरत होती
    है, ताकि बीपीओ कंपनी में क्वालिटी वर्क किया जा सके। जिस देश के लिए सर्विस प्रोवाइड
    करना है, वहीं की भाषा और शैली में काम करना होता है, इसलिए सही उच्चारण और कार्यशैली
    के लिए पर्याप्त ट्रेनिंग की जरूरत होती है। चूँकि भारत की परंपरागत शिक्षा पद्धति
    और सरकारी क्षेत्र में इन नए क्षेत्रों के बारे में कुछ पढ़ाया नहीं जाता और किसी तरह
    की ट्रेनिंग उपलब्ध नहीं है, इसलिए इस दिशा में निजी क्षेत्र द्वारा ही महत्वपूर्ण
    भूमिका निभाई जा रही है। इस तरह के प्रयास हीरो माइंडमाइन, अकिको कालनेट जैसी संस्थाओं
    द्वारा भी किए जा रहे हैं। इनके द्वारा दो माह से लेकर एक वर्ष तक के कोर्स चलाए जा
    रहे हैं । छात्रों का रूझान जैसा होता है, उसे उसी के अनुरूप ट्रेनिंग बारहवीं या ग्रेजुएशन
    के बाद दी जा सकती है। यदि स्टूडेंट अंडर ग्रेजुएट के दौरान इस तरह का कोर्स करते हैं,
    तो यह उनके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है। इसका कारण यह है कि डिग्री कोर्स के
    साथ-साथ उनकी ट्रेनिंग भी पूरी हो जाएगी और इसके तुरंत बाद वे नौकरी ज्वाइन कर सकते
    हैं इस तरह उनका अतिरिक्त समय नष्ट नहीं होता है।
    

    

    बीपीओ से संबंधित पाठ्यक्रम करने के उपरांत रोजगार के काफी चमकीले अवसर मौजूद हैं।
    आईबीएम जैसी बड़ी व मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी की शुरुआत 20 हजार रुपए प्रतिमाह
    की सैलरी से होती है जबकि डोमेस्टिक कंपनियों में 5 से 10 हजार रुपए से शुरुआत हो सकती
    है। दक्षता और अनुभव बढ़ने के साथ सैलरी में भारी वृद्धि होती जाती है।
 

    बीपीओ की ट्रेनिंग संबंधी जानकारी देने वाली प्रमुख वेबसाइट एवं ईमेल एड्रेस इस प्रकार
    हैं-
    वेबसाइट- www.iscentglobal.com
    वेबसाइट- www.infovisiongroup.com
     ईमेल एड्रेस- hr@gvedge.com

www.careerdisha.org

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